उन्नीसवीं शताब्दी
कानूनी उत्पीड़न
1879·Roumanie
परिणाम ठीक वैसे ही दिया गया है जैसे स्रोत उसे लिखता है — न पूर्णांकित, न किसी दूसरे में जोड़ा हुआ। एक घटना का आँकड़ा दूसरी घटना के आँकड़े से आंशिक रूप से मिलता है।
संविधान के अनुच्छेद 7 के संशोधन से नागरिकता प्रदान करने को संसद के मामला-दर-मामला मतदान के अधीन किया जाता है, जिससे यहूदी अपने ही देश में राज्यविहीन हो जाते हैं
Berlin की कांग्रेस ने रोमानियाई स्वतंत्रता की मान्यता को इस शर्त से जोड़ा था कि धर्म के भेद के बिना सभी निवासियों को नागरिक समानता प्राप्त हो। 1879 में अपनाया गया संविधान के अनुच्छेद 7 का संशोधन इसका एक हास्यास्पद क्रियान्वयन प्रस्तुत करता है : नागरिकता अब केवल ईसाइयों तक सीमित नहीं रही, किंतु अब इसे संसद द्वारा व्यक्ति-दर-व्यक्ति, एक-एक कर मतदान से स्वीकृत किया जाना आवश्यक हो गया।
इसके बाद के दशकों में वास्तव में दी गई नागरिकताएँ मुट्ठीभर ही रहीं। एक पूरी जनसंख्या, जो Romania में जन्मी थी और जिसका कोई अन्य देश न था, कानूनी दृष्टि से अपने ही घर में विदेशी बनी रही — बिना राजनीतिक अधिकारों के, राष्ट्रीय नागरिकों के लिए आरक्षित व्यवसायों से बहिष्कृत, और इस कारण किसी भी उपाय के बिना।
- काल :
- उन्नीसवीं शताब्दी
- प्रकृति :
- उत्पीड़न
- क्षेत्र :
- मध्य और पूर्वी यूरोप
- देश :
- Roumanie
Actes du congrès de Berlin ; débats parlementaires roumains sur la révision constitutionnelle.