शोआ (1939 – 1945)
Piaski की यहूदी बस्ती का सफाया
mars 1942·Piaski
परिणाम ठीक वैसे ही दिया गया है जैसे स्रोत उसे लिखता है — न पूर्णांकित, न किसी दूसरे में जोड़ा हुआ। एक घटना का आँकड़ा दूसरी घटना के आँकड़े से आंशिक रूप से मिलता है।
Lublin के पूर्व में स्थित यह पारगमन कस्बा था जहाँ Reich से आए यहूदियों को रखा गया था, और वसंत में Bełżec की ओर काफिले रवाना होने से पहले वे यहीं ठहरे थे।
Piaski, Lublin के पूर्व में Chełm की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक क़स्बा था, जो लगभग पूर्णतः यहूदी था। आक्रांता इसे ज़िले के पारगमन केंद्रों में से एक बनाता है : बंद यहूदी क्षेत्र में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, बोहेमिया और स्लोवाकिया से निर्वासित हज़ारों यहूदी आते हैं, जो वहाँ केवल कुछ दिन ही रुकते हैं और फिर मृत्यु शिविरों की ओर भेज दिए जाते हैं। Piaski के निवासी भी इन क़ाफ़िलों का भाग्य भोगते हैं जब उनकी बारी आती है, वसंत ऋतु में : उन्हें पहले Bełżec और फिर अंतिम लोगों को Sobibór भेजा जाता है। इसके बाद क़स्बे को यहूदी-मुक्त घोषित कर दिया जाता है और उसके घर बाँट दिए जाते हैं।
- काल :
- शोआ (1939 – 1945)
- प्रकृति :
- शोआ
- क्षेत्र :
- मध्य और पूर्वी यूरोप
- देश :
- Pologne
Pinkas Hakehillot Polin ; Yad Vashem, base des communautés.