अठारहवीं शताब्दी
Joseph Süss Oppenheimer के निष्पादन के बाद डची से यहूदियों का निष्कासन
1739·Wurtemberg
परिणाम ठीक वैसे ही दिया गया है जैसे स्रोत उसे लिखता है — न पूर्णांकित, न किसी दूसरे में जोड़ा हुआ। एक घटना का आँकड़ा दूसरी घटना के आँकड़े से आंशिक रूप से मिलता है।
निवास का विशेषाधिकार रद्द कर दिया गया
Joseph Süss Oppenheimer Württemberg के ड्यूक Charles-Alexandre के वित्तपोषक रहे थे; ड्यूक की मृत्यु के पश्चात् उन्हें गिरफ़्तार किया गया, मुकदमा चलाया गया और Stuttgart में फाँसी दे दी गई। इसके तुरंत बाद ड्यूकल राज्य के यहूदियों का निवास-अधिकार रद्द कर दिया गया और समुदाय को वहाँ से जाना पड़ा।
यह प्रकरण "दरबारी यहूदी" की स्थिति का एक प्रतिनिधि उदाहरण है: जब तक राजकुमार जीवित रहता, वह उसके लिए अपरिहार्य होता; उसके मरते ही उसे कोई सहारा नहीं मिलता, और शासनकाल की जो भी अलोकप्रिय बातें होतीं, उनका उत्तरदायी वही ठहराया जाता। यह मुकदमा एक ऐसे प्रचार का आधार बनेगा जो उस सदी से कहीं आगे तक खरीदार पाता रहा — नाज़ी सिनेमा ने इसी प्रकरण से अपनी सर्वाधिक प्रसारित फ़िल्मों में से एक की सामग्री ली।
- काल :
- अठारहवीं शताब्दी
- प्रकृति :
- निर्वासन
- क्षेत्र :
- पश्चिमी यूरोप
- देश :
- Allemagne
Actes du procès de Stuttgart ; études sur les Juifs de cour dans le Saint-Empire.